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वो नासमझ  बेटियां कुछ तो सोचा होता  कुमारी किर्ती अमृता आशा...
'माँ' दिल छू जाने वाली एक शानदार रचना कुमारी कीर्ति अमृता आशा
मैं हार जाऊँगी  ये कैसे मान लिया तुमने  कुमारी किर्ती अमृता आशा
 "महबूब" ना तेरा साथ मिला ना ही तू हमसफर  बना कुमारी किर्ती अमृता आशा
एडजस्टमेंट की उम्मीद सिर्फ लड़कियों से ही क्यों ..कुमारी किर्ती अमृता आशा
कविता  सहूलियत....लोग अक्सर अपनी सहूलियत से बदल जाते है ।
कविता  लालच ... कुछ  ज़्यादा  पाने की चाहत...
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